हिन्दी कविता : राधे कृष्ण, राधे कृष्ण ही दोहराऊं।।

हे कृष्ण ,
हर पल दिल ये मेरा कहता है
हर वक्त तू संग मेरे रहता है।
करते हो तुम मेरी दुविधाओं का निवारण
रोम रोम मेरा हे कृष्ण-कृष्ण कहता है।।

हे कृष्ण , चाहू में मीरा बन तेरी भक्ति में खो जाऊ
विष पीकर एक बार तुझे मै भी आजमाऊँ ।
तेरी मुरली की धुन में, मै मदहोश होकर
राधे कृष्ण, राधे कृष्ण ही दोहराऊं।।

हे कन्हैया बनो मेरे मार्गदर्शक
जैसे अर्जुन को राह दिखाई ।
महाभारत के युद्ध में तुम ने
पांच पांडव को जीत दिलायी ।।

हे कृष्ण, तुम गीता का सार हो
तुम नदिया सागर जैसे विशाल हो।
रुक्मणि के परमेश्वर और राधा के प्रियतम प्यार हो
मेरे इस मानव जीवन के तुम ही पालनहार हो ।।

हे कृष्ण, द्वारकाधीश तुम ही लड्डू गोपाल हो
तुम ही सुदामा की मित्रता का व्रतांत हो ।
तुम नटखट गोकुल के छलिया ग्वाल हो
प्रेम परिभाषा की कलयुग में तुम ही एक मिसाल हो।।

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